कैमरा का इतिहास क्या है? सम्पूर्ण जानकारी।

आप सभी अपनी प्रतिदिन की दिनचर्या में फोटो खींचते होंगे फिर चाहे वह स्मार्टफोन से हो या camera से। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है की यह कैमरा जो आप आज बड़ी आसानी से इस्तेमाल करते हो ये आया कहाँ से है या फिर इस camera को किसने बनाया है या कैमरा को बनाने के पीछे का इतिहास (history of camera) क्या है?

अगर नहीं तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़े। क्योकि इसमें मैं आपको कैमरा का पूरा इतिहास (history of camera) बताऊंगा की camera की शुरुआत कहाँ से हुई थी और आज जो आपके हाथो में यह camera है वह किस तरह से विकसित हो कर आया है। तो चलिए फिर आज के टॉपिक को शुरू करते है।

Camera का इतिहास क्या है? History of Camera

कैमरा के इतिहास को समझने के लिए आपको सबसे पहले कैमरा के सिद्धांत को समझना होगा। दरअसल कैमरा एक सिद्धांत पर काम करता है जिसे Camera Obscura कहते है। यह एक latin शब्द है और इसका मतलब होता है dark chamber मतलब अंधेरे वाला कक्ष। अब आप यह सोच रहे होंगे की यह camera obscura क्या है और यह कैसे काम करता है? तो सबसे पहले हम इसी के बारे में बात करते है।

Camera Obscura क्या है?

दरअसल कैमरा ऑब्स्क्योरा एक optical device है जिससे पहले के जमाने में फोटो को लिया जाता था। कैमरा ऑब्स्क्योरा में एक बड़ा कमरे के बराबर एक बॉक्स होता है और उस बॉक्स में एक छेद होता है। बाहर से light इस छेद में अंदर जाता है और फिर कमरे की दीवार से टकराता है। इससे बाहर का दृश्य अंदर पीछे वाली दीवार पर प्रदर्शित होता है और अंदर बैठा व्यक्ति उस आकृति को एक पेपर पर trace कर लेता है।

history of camera

आप इस इमेज में Camera Obscura को देख सकते है।

Camera Obscura में एक दिक्कत यह थी की इसमें जो आकृति दीवार पर दिखाई देती थी वह उलटी होती थी।

history of camera

यह इमेज Camera Obscura का एक छोटा सा उदहारण है। कैमरा ऑब्स्क्योरा से ली गयी फोटो दीवार पर ऐसे उलटी ही दिखती थी।

कैमरा ऑब्स्क्योरा में उलटी दिखने वाली फोटो को 18वी शताब्दी में ठीक कर दिया गया। क्योकि 18वी शताब्दी में कैमरा ऑब्स्क्योरा में शीशे का इस्तेमाल होने लगा था जिससे उलटी दिखने वाली फोटो सीधे हो गयी थी।

Camera obscura

Camera का इतिहास क्या है? History of Camera

Camera Obscura का सबसे पहला लिखित रिकॉर्ड Mozi (470 से 390 ईसा पूर्व) के लेखन में पाया जाता है जो की एक चीनी philosopher और mohism के संस्थापक है। Mozi ने अपने लेख में सही ढंग से कहा कि कैमरा ऑब्स्क्योरा में छवि उलटी हो जाती है क्योंकि प्रकाश अपने स्रोत से सीधी रेखा में यात्रा करता है जैसे ही पिनहोल छोटा किया जाता है, इमेज sharp हो जाती है, लेकिन दीवार पर projected इमेज धुंधली हो जाती है।

इसके बाद इराकी वैज्ञानिक Ibn al-Haytham ने पहला कैमरा ऑब्स्क्योरा बनाया। इसके बाद सन 1490 में Leonardo Da Vinci ने इमेज को पेपर पर ट्रेस करने का तरीका खोजा था।

इसके बाद सन 1826 में Joseph Nicéphore ने पहला पिनहोल कैमरा बनाया। इसके बाद Joseph Nicéphore ने जब इमेज को पेपर पर ट्रेस किया। तो पता चला की जो इमेज वह पेपर पर बनाते थे वह इमेज बहुत जल्दी धुंधली हो जाती थी।

इसके बाद Joseph Nicéphore और Louis Daguerre ने सिल्वर क्लोराइड को bitumen से बदला। इससे इमेज के धुंधले होनी की समस्या तो खत्म हो गयी थी लेकिन इससे पिनहोल कैमरा में इमेज स्क्रीन पर आने में घंटे लगते थे। इसके बाद इसके बाद Joseph Nicéphore और Louis Daguerre ने इमेज एक्सपोज़र के लिए मरकरी फिल्म का इस्तेमाल किया। इससे इमेज घंटो की जगह मिंटो में एक्सपोज़ होने लगी।

इसके बाद सन 1839 में यह कैमरा आम जनता के लिए उपलब्ध हो गया।

इसके बाद George Eastman ने फोटोग्राफिक का उपयोग किया और 1885 में पेपर फिल्म का निर्माण शुरू किया। फिर George Eastman ने 1888 में kodak कंपनी को स्थापित किया। और अपना पहला कैमरा की बिक्री शुरू की। यह एक बहुत ही साधारण बॉक्स कैमरा था जिसमें fixed-focus lens और single shutter speed थी। इसमें kodak की 100 एक्सपोज़र फिल्म भी होती थी। Camera roll खत्म होने पर कैमरा को भरने के लिए वापस फैक्ट्री भेजा जाता था।

इसके बाद George Eastman ने सन 1900 में Brownie कैमरा लॉन्च किया। यह कैमरा बाजार में बहुत लोकप्रिय बन गया और 1960 तक इसके विभिन्न मॉडल बाजार में मिलते रहे।

इसके बाद सन 1907 में Auguste Lumière और Louis Lumière ने ऑटोक्रोम मेथड का दुनिया के सामने परिचय दिया। लेकिन इसकी भी एक खामी थी इससे फोटोग्राफ काफी dark आती थी। इसके बाद kodak कंपनी ने सन 1930 में kodachrome फिल्म से इस कमी को दूर किया। इससे फोटो साफ और रंगीन बनती थी। इसके बाद kodak ने 30 mm फिल्म रोल को लॉन्च किया। इसके बाद से color photography आम जनता के लिए उपलब्ध हो गई।

इसके बाद बाजार में बाकी कई कंपनी आई। और कैमरा को और बेहतर बनाने के लिए सभी कंपनी ने काम करना शुरू कर दिया।

इसके बाद फोटोग्राफर ने यह ध्यान दिया की जो फोटो क्लिक करते समय viewfinder में दिखती थी वह फोटो क्लिक होने के बाद नहीं दिखती है क्योकि उस समय कैमरा में दो लेंस होते थे एक लेंस से viewfinder में देखा जाता था और दूसरे लेंस से फोटो क्लिक होती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए SLR कैमरा का आविष्कार हुआ।

इसके बाद 1948 में Edwin Herbert Land ने  Polaroid Model 95 लॉन्च किया। यह पहला ऐसा कैमरा था जो फोटो क्लिक करते ही इमेज को कुछ ही मिनटों में प्रिंट कर देता था। लेकिन यह कैमरा बहुत महंगा था इसे हर कोई खरीद नहीं सकता था। इसके बाद 1960 में कम कीमत वाले components आने के कारण कैमरा सस्ते हुए।

इसके बाद 1975 में कोडक के इंजीनियर Steven Sasson ने पहला डिजिटल कैमरा का आविष्कार किया। इसका वजन 3.6 किलोग्राम था और यह 0.1 megapixel का कैमरा था। इसके बाद 1989 जापान में पहला पोर्टेबल कैमरा fuji ds- x लॉच हुआ। इसके बाद 1995 में पहल डिस्प्ले कैमरा Casio QV-10 लॉन्च हुआ। इसके बाद इसी साल Ricoh RDC-1 कैमरा लॉन्च हुआ। यह पहला ऐसा camera था जिससे वीडियो रिकॉर्ड की जा सकती थी।

इसके बाद सन 2000 में sharp कंपनी ने पहला कैमरा वाला फ़ोन लॉन्च किया। इसके बाद सन 2003 में सोनी ने sony erricson पहला फ्रंट कैमरा फ़ोन लॉन्च किया। इसके बाद देखते देखते सभी कंपनी अपने अपने फ़ोन में camera लगाने लगी। और बाजार में कैमरा फ़ोन की तो बाढ़ ही आ गई।

आज आपको मार्किट में बढ़िया से बढ़िया एडवांस dslr कैमरा मिल जाएंगे। जिनसे आप बहुत ही बढ़िया और प्रोफेशनल फोटो क्लिक कर सकते है। इसी तरह मार्किट में आज एक से बढ़कर एक कैमरा फ़ोन है जिनकी कैमरा क्वालिटी dslr से काफी हद तक मिलती है।

मुझे उम्मीद है की आपको कैमरा का पूरा इतिहास (history of camera) अच्छा लगा होगा। अगर फिर भी आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो आप हमे निचे कमेंट करके बता सकते है। हमे आपकी मदद करने में ख़ुशी होगी।

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